Essay on Modern Indian Women in Hindi (आधुनिक काल की नारी पर निबंध हिंदी में)

Essay on Modern Indian Women in Hindi

भारतीय नारी का परिचय : – “यत्रं पूज्यन्ते नारीस्तु ,तत्रं रमन्ते देवत:” हमारे भारत देश की महान संस्कृति में नारी (Indian Women) का स्थान देवता के रूप में देखा गया है। आज कल एक विषय इंटरनेट पर बहुत खोजै जा रहा है वो है Essay on Modern Indian Women in Hindi, हमने ये निबंध आपके लिए सरल हिंदी में लिखा है। नारी को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। शुभलक्ष्मी गृहालक्ष्मी भाग्यलक्ष्मी के रूप में नारी का उल्लेख किया जाता है बहुत सारे हिंदू धर्म के त्योहारों में महिलाओं का और लड़कियों की पूजा की जाती है! ”जिस घर में लड़कियों और औरतों की मुस्कुराहट और खिलखिला हट हो वहां कोई वास्तु दोष नहीं माना जाता ऐसा हमारा पुराण कहता है”! मानव की उत्पत्ति से मानव की उत्क्रांति तक और आज मानव का बौद्धिक सांस्कृतिक विकास हुआ है।

Essay on Modern Indian Women in Hindi आधुनिक भारतीय स्त्री पर निबंध

जब पृथ्वी पर मनुष्य की उत्पत्ति हुई तब बाकी प्राणियों जैसे अपनी मनुष्य जाति को ट़िकाने के लिए पुनरुत्पादन एवं प्रजनन क्षमता भी विकसित हुई!नर यानी पुरुष और मादा यानी नारी का निर्माण हुआ; मानव की उत्पत्ति से उसकी उत्क्रांति तक स्त्री और पुरुष दोनों एक साथ लगातार अपने-अपने किरदार को बखुबी से निभाते आ रहे हैं ।

अश्मयुग से आज तक, भटके जीवन से गृहस्थ जीवन तक के सफर में स्त्री-पुरुष दोनों एक दूसरे के लिए पूरक है । स्त्री और पुरुष दोनों से ही मानव वंश को आगे बढ़ाया जा सकता है ;इसलिए अपनी प्रजाति की टिकाने के लिए दोनों की समान रुप से जरूरत है। इसमें ना कोई बड़ा है ना कोई छोटा है ;स्त्री और पुरुष दोनों को ही समानता के साथ एक दुसरे को जानना और देखना जरूरी है। मानव उत्थान में दोनों बराबर के भागीदार होते हैं स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर ही संसार आगे बढ़ा रहे है।

जब से मनुष्य अश्मयुग से नागरी जीवन में आया है, पुराने जमाने की कुछ बातें और परंपरा आज भी मनायी जाती है,जैसे पुराने जमाने में लोग टोलियों में रहतें थे,उस  हर टोली का एक प्रमुख नेता रहता था जो पूरे प्रजाति का नेतृत्व करता था साथ-साथ बाहरी आक्रमणों से टोली और समुदाय के लोगों के रक्षण की जिम्मेदारी लिया करता था, जिसे सभी अपनी टोली का राजा या मुखिया  मानते थे।

बाहरी आक्रमणों‍ से लड़ने में शारीरिक तुलना से महिलाएं पुरुषों से अक्षम होती है, पुराने जमाने में जब कोई अाक्रमण होता होगा तब महिलाओं की शारीरिक क्षमता और शक्ति कम पड़ती रही होगी इसीलिए जाति के पुरुष महिलाओं और बच्चों का संरक्षण करते रहे होंगे! जिसकी विपरीत चाल आजतक आगे चलने लगी है।

जिससे महिलायों को कमजोर मानना,दुय्यम स्थान देना बढ़ता गया होगा,जिससे धीरे-धीरे पुरुष प्रधान संस्कृति की नींव बढ़ने लगी होगी! राजा-महाराजाअों के काल में तो स्त्री को केवल एक भोग वस्तु के रूप में देखा जाने लगा ,महाराजाओं के दरबारों में स्त्री और को वस्तु का दर्जा मिलता था और एक पुरुष के अनेक स्त्री होना मतलब अधिक संपत्ति होना माना जाता था । स्त्री के पति को उसका मालिक का दर्जा मिलता था, पुराने जमाने में एक पुरुष की बहुत सारी स्त्रियां पत्नियां हुआ करती थी।

उत्क्रांति से प्राचीन काल तक का स्त्री जीवन Journey of Women from Human Evolution to Ancient Ages in Hindi

प्राचीन काल में भारत में मातृसत्ताक एवं स्त्रीप्रधान कुटुंबव्यवस्था थी उसके बाद पितृसत्ताक और पुरुष प्रधान संस्कृति का उद्गम हुआ, परिवार के सभी निर्णय पुरुष लेने लगे बाद में सभी इसके इतने आदि हो गए कि महिलाओं का स्थान दिन-ब-दिन नीचे गिरता गया।जहां महिलाओं को दोयम स्थान दिया जाता था पुरुष प्रधान संस्कृति में महिलाओं का स्थान केवल दासी जैसा था।

घर के काम करना बच्चे पैदा करना और चुल्हे चौखट में रहना मानो महिलायों की पूरी जिंदगी गुजर जाती थी। जैसे-जैसे सदिया गुजरती गई और भारत के लोगों को बाहरी संस्कृति से परिचय होता गया। भारत पर मुगल पुर्तगाल और ब्रिटिश लोगों ने बड़े समय तक राज किया इस राज कार में भारत के लोगों का उन संस्कृति के साथ परिचय हुआ मुगल काल में तो जब भारत पर मुगल राजाओं के आक्रमण होते थे तब उनका पहला निशाना भारत की संपत्ति सोना चांदी और खजाना के साथ-साथ भारत की औरतों पर बुरी नजर रहती थी। (Essay on Modern Indian Women in Hindi)

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Essay on Modern Indian Women in Hindi

मुगल काल में कुछ राजाओं के राज्य काल में सरेआम महिलाओं के साथ अत्याचार किये जाते थे मुगल साम्राज्य के के बाद जब ब्रिटिश लोगों ने भारत पर राज्य करना शुरू कर दिया तब भारत के लोगों को यूरोपीय संस्कृति का परिचय होने लगा जिससे उन्हें पता चला कि औरत केवल उपभोग की वस्तु नहीं है या किसी की दासी नहीं है औरत को खुद का एक व्यक्तिमत्व है और वह भी स्वतंत्र व्यक्ति है।

भारत के विद्वान और बुद्धिजीवी लोग जब अपनी पढ़ाई के लिए विदेश जाने लगे तब पाश्चात्त्य संस्कृति से उनका सामना हुआ, तब उन्हें पता चला कि महिलाओं के साथ संस्कृति के नाम पर बहुत ही बुरा व्यवहार सदियों सें चलता आ रहा है। गार्गी और मैत्रेयी प्राचीन काल में प्रसिद्ध विदुषी थी जिन्होनें अपने ज्ञान एवं प्रतिभा सें अच्छे अच्छे पंडितों को वादविवाद में हराया था!

मुगल काल में रझिया सुलताना ने दिल्ली का तख्त भी खुबी से सँभालकर इतिहास रचा था!

ब्रिटिश काल में महिलायों की अवस्था Indian Women’s Status in Early British Period in Hindi

ब्रिटिश काल के शुरुवाती दौर में महिलायों की स्थिती बहुत ही बुरी थी।खेती में दिनभर काम करना और मजदुरों से भी बदतर अवस्था में महिलाये रहती थी!चुल्हा चौखट में सारा जीवन व्यतीत करती थी,उन्हें न कुछ बोलने का मौका मिलता था ना उन्हें कुछ स्वातंत्र्य था की वे अपने विचारों को लोगों के सामने बोल सके एवं गलत का विरोध कर सके।

१८वी सदीं में राजा राममोहन राय ,न्यायमूर्ति रानडे,गोखले,आगरकर,जोतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, सरोजिनी नायडू,पंडिता रमाबाई जैसे समाज- सुधारककों ने अपने सामाजिक प्रबोधन के कार्य के जरिए महिला मुक्ति एवं स्त्री-शिक्षण के लिए काम करना शुरू किया। उन्होंने सामाजिक निरिक्षण किया उससे उन्होने देखा और जाना की महिलाओं को उनके साथ जो व्यवहार हो रहा है वह गलत है या सही है ये तक पता नही है,अगर महिलायें शिक्षित हो जाए,मात्र तब ही उन्हें पता चलेगा कि उनपर क्या अन्याय हो रहा है ?

उन पर  होनेवाले अन्याय का उन्हें कैसे विरोध करना है? और उससे कैसे बाहर आना है? ब्रिटिश काल में भारत में बाल विवाह,विधवा मुंडन,जरठ कुमारी विवाह ,सती प्रथा जैसी बुरी प्रथा और रुढ़ीयों का चलन और पालन होता था।धर्म के नाम पर कर्मकांड का प्रयोग किया जाता था, ऐसी कुप्रथा से मात्र स्त्रीयों का ही शोषन होता था और उसका जोर शोर से समर्थन बलपूर्वक पुरुषों से एवं समाज के पंच गण व्यक्तिअों से किया जाता था।

छोटी बच्चियों का विवाह कच्ची उम्र में अपने से ३०-४० साल बड़े उम्र के पुरुषों के साथ कर दिया जाता था, जिससे बहुत कम उम्र और बचपन में गर्भावस्था और प्रसूति के कारण लड़कियों की कम उम्र में मृत्यु हो जाती थी, साथ ही बूढ़े पुरुषों से शादी करने पर पति के मरने के बाद उन्हें जनरीत के नामपर बलपुर्वक सती जाना पड़ता था या तो जीवनभर अपने सभी गहने उतार कर मुंडन करके पूरी जिंदगी भर,ससुराल में वंचित के जैसे घर का बचा कुचा खाना खाकर और आश्रित या गुलाम जैसे रहना पड़ता था।

ऐसी स्थिती में इन महिलायों को किसी भी सामजिक और धार्मिक कार्य में हिस्सा लेने की या उपस्थित रहने तक की अनुमती नही मिलती थी,विधवा को देखना मानो साँप सुँघने जैसा प्रतित मान कर उन्हे धार्मिक कार्यों से निष्काषित किया जाता था।

प्रबोधनकाल स्त्री-शिक्षण Era of Social Enlightenment And Awakening-impact on Women Education

१८ वी सदी के मध्य से जव ब्रिटीश राजवट हिंदुस्तान मे अपने पैर जमाने लगी थी,उस वक्त भारत से बहुत से विद्वान पंडीत वर्ग यातायात के साधनों के प्राप्त होने के कारण विदेश में पढ़ने चले जाते थे।विदेशों मे रहकर और पढ़कर आये लोग हिंदुस्तान और विदेशी तुलना कर के यहा पर रुढ़ी परंपरा के मायने और अपने देश के अविकसित होने के कारण ढूँढने लग गये थे।

विदेशों से लौटकर आये इन विद्वान अभ्यासकों ने बारीकेसे हिंदुस्तान के जनजीवन का निरीक्षण किया,जिससे हमारे हिंदुस्तान के पिछडेपण का कारण अज्ञानता,कर्मकांड और कुप्रथा है ये बातें उनके समझ में आ गयी। इस काल में बहुत से समाज सुधारकों ने महिलाओं को शिक्षित करने पर काम करना शुरु किया,महिला और लड़कियों के शिक्षाहेतू बहुत सारे स्कूलों की स्थापना की गई जिसमें जोतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले को न जाने कितनी परेशानियों एवं संकटो का सामना करना पड़ा।

लोगों ने उनकी जान तक लेने की साजिशे की पर वे डँटे रहे और शिक्षा का कार्य निरंतरता से आजीवन करते रहे, और उन्हीं बदौलत आज सब लड़कियां और महिलाएं पढ़ पा रही है,घर से बाहर रोजगार नौकरी कर रही है ! भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी ने तो विदेश में जाकर अपनी एम.बी.बी.एस डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की और भारत में शिक्षा की गंगा ही बहने लगी और हर महिला और लड़की को शिक्षा के दरवाजे खुले हो गए।

आज भारत की बेटियां देश -विदेशों में जाकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है,विदेशों मे नौकरीयां कर रही है, साथ साथ हर एक क्षेत्र में अपना नाम बनाकर देश के नाम के झँडे पूरे विश्व में गाड़ने में समर्थ हो रही है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ,पूर्व राष्ट्रपती प्रतिभा पाटील,क्रांतीकारी सरोजिनी नायडू ,प्रथम महिला आई.पी.एस किरण बेदी, परमवीर चक्र प्राप्त पहिली महिला नीरजा भनोट,फ्लाईट लेफ्टनंट गुंजन सक्सैना ,भारत की पहली मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय, भारत की पहली मिस युनिवर्स सुष्मिता सेन ,अंतरालवीरांगना कल्पना चावला ऐसी महान बेटियों ने भारत माँ की शान और नाम पूरे विश्व में बढ़ाया है।

भारतीय नारी की आज की परिस्थिति Status of Indian Women in Today’s World in Hindi

शिक्षा के साथ अपने अधिकार एवं कर्तव्य के प्रति हर एक लड़की और महिला जागरूक एवं सजग है।

भारतीय कायदेकानून और संविधान ने महिला और पुरुष दोनों को बराबर के अधिकार दिए हैं साथ में व्यक्ति- स्वतंत्रता का भी अधिकार दिया है, पुरानी कल्पना से परे महिला केवल उपभोग की वस्तु या दासी नहीं है बल्कि वह एक स्वतंत्र व्यक्ति और स्वतंत्र व्यक्तिमत्व है, जिसे विचार और अभिव्यक्ति का समान स्वातंत्र्य है। महिलाओं के लिये संवैधानिक कायदे और अधिकार- पुराने जमाने में महिलाओं को बहुत सारे अत्याचार एवं अन्याय सहन करने पड़ते थे, उन्हें कोई मारता, पीट़ता भी था तो उन्हें चुप कराया जाता था।

वे चुपचाप अन्याय को सह जाती थी मगर आज ऐसा नहीं है !आज हमारे भारत सरकार ने बहुत सारे महिला सबलीकरण और सशक्तीकरण के कार्य लगातार लागु किए हैं जिस कारण हर एक महिला अपने ऊपर होने वाले अन्याय पर बेझिजक और निड़र होकर आवाज उठ़ा सकती है और अन्याय करने वाले को न्यायालय से सजा भी दे सकती है।

समय के साथ महिला और लड़कियों में अपने प्रति जागरूकता एवं आत्मविश्वास बढ़ने लगा है, जिसकी बदौलत आज बहुत सारी लड़कियां जोखिम वाले कार्य भी सहजता से कर रही है।पुरुषों के माने गये क्षेत्र जैसे मिलिटरी और एअरफोर्स में भी आज महिलायों की टुकड़ीयां आत्मविश्वास के साथ काम करती देश सीमा अों की सुरक्षा कर रही है!

महिलायों की नौकरियां और घर गृहस्ती Women’s Working Professionals And Family Life in Hindi

अपनी शिक्षा की उपलब्धि से अच्छे पदों पर विराजित लड़कीया और महिलायें नौकरी कर के अपने घर के खर्चों में हाथ बँटा रही है। नौकरी के साथ- साथ वह अपने गृहस्थ जीवन में भी घर गृहस्ती अच्छी तरह से संभाल रही है। आज महिलाएं जानती है कि एक के कमाई से घर नहीं चलता आर्थिक विवंचना में पड़ने से अच्छा है कि पति-पत्नि दोनों काम करें ,घर का खर्चा भी निकल जाएगा और अपना आर्थिक स्थर भी बढ़ जायेगा।

आधुनिक भारत में महिलाओं का स्थान- आधुनिक भारत में महिला पुरुष के कंधे से कंधे मिलाकर हरे क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही है और अपनी काबिलियत के जोर पर हर एक जिम्मा में उठा रही है। आज महिला स्वयंपूर्ण है और अपने पैरों पर खुद खड़ी है जिसके चलते उन्हें कभी असहाय या लाचार होने की जरूरत नहीं पड़ती। आज के दौर में महिला सही मायनें में लक्ष्मी, सरस्वती एवं दुर्गा भी है।

निष्कर्ष Conclusion

आधुनिक भारतीय नारियों की स्थिति और भी स्वयंपूर्ण और भी अच्छी बनना बाकी है ,कुछ कुछ जगह पर अभी भी महिलाओं को अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों पर उन्हें सतर्क करने की जरूरत है, आज महिला हर एक क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधे मिलाकर आगे बढ़ रही है। डॉक्टर, इंजिनियर,पायलट से लेकर संसद में भी बतौर सांद रुप में महिला देश के मुद्दो पर सवाल उठा रही है, यह बहुत सकारात्मक बात है। महिलाओं और लड़कियों को अगर अच्छे रोजगार प्राप्त हो सकते हैं और आर्थिक विवंचना से सही मायने में मुक्त हो जायेंगी जिससे महिलाये पैसा कमाने के साथ- साथ उसे सही ढंग से निवेश भी जान सकेंगी।

आशा करता हूँ आधुनिक भारतीय नारी पर लिखा ये निबंध या Essay on Modern Indian Women in Hindi आपको ज़रूर पसंद आया होगा। अपना अनुभव हमारे साथ ज़रूर शेयर करें। इस निबंध को पढ़ने के लिए धन्याद।

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नमस्कार दोस्तों, में अरुण शर्मा इस ब्लॉग का ऑथर हूँ, और एक अनुभवी ब्लागर (Blogger) भी। इस ब्लॉग के माध्यम से मैं सेहत , तकनीकी , भू-गौलिक व , मनोरंजन जैसी विशेष जानकारी आपके साथ साँझा करूँगा।

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