Dairy Farming Business in Hindi कैसे शुरू करें डेअरी फार्मिंग का व्यवसाय ?

अनुक्रम

अगर आप Dairy Farming करने की योजना बना रहे हैं तो आपको इस लेख में Dairy Farming Business in Hindi भाषा में बताया जाएगा। इस लेख को पूरा पढ़ें क्यूंकि इस लेख में Dairy Farm Kholne Ka Tarika और वो हर एक चीज़ जो डेली फार्म के लिए उपयोगी होती है।वह विस्तार से बताई गयी है।

इस व्यापार का नाम है पशु पालन और इसे हम दूध डेरी के नाम से भी जानते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की हर साल ये बिजनेस बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है।

डेरी फार्म को शुरू करने के लिए हम आपको बताएँगे डेरी फार्मिंग क्या है, कैसे शुरू करें Dairy Farming, किस तरह से गाये का चुनाव करें, Cow Palan Kaise Kare, किस तरह से और कहाँ से सब्सिटी ली जाती और कौन कौन सी सरकारी योजनाएं हैं Dairy Farming की इत्यादि।

चलिए विस्तार से पढ़ते हैं दूध डेरी प्रोजेक्ट यानि Dairy Farming Business Hindi Mein

कैसे शुरू करें डेअरी फार्मिंग का व्यवसाय ? (How To Start Dairy Farming Business in Hindi)

अगर आपको Dairy Farming Business शुरु करना है तो आप को कुछ बातों की जानकारी होनी बेहद जरुरी है,

  • Dairy Farm के लिये कौन सी जमीन चुने?
  • यातायात के साधन कौन से उपयोग में लाने है?
  • निकाले दूध को ज्यादा देर तक टिकाये रखने के लिये Refrigerator का उपयोग कैसे करे?
  • ऐसी बहुत सारी बाते यह व्यवसाय शुरु करने से पहले जान लेना बहुत जरुरी है।

हम आपको इसके बारे में विस्तार में जानकारी प्रदान करते है, Dairy Farming Business शुरू करने से पहले ध्यान में रखने वाली कुछ आवश्यक बातें-

1.# व्यवसाय योजना – (Dairy Farming Business Planning) :

Dairy Farm शुरू करने से पहले जिस जगह पर आपको Dairy Farm शुरू करना है उस जगह का अंदाज लेना पड़ता है,

जैसे भविष्य में दूध का उत्पादन शुरू होने के बाद उस उत्पादन को यातायात करने के लिए नजदीक में रास्ता होना चाहिए, जिससे आसानी से हम दूध की बोतले और केटल्स वहां से रास्ते पर से शहर में लेकर जा सकते हैं।

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2.# विपनन,यातायात साधन – (Marketing,Transportation Means) :

अगर आप का Dairy Farm बहुत दुर्गम जगह पर आप बनाने जा रहे हैं।

तो आपको स्वयं पहले यातायात हेतू रास्ता बनाना होगा।

जिससे आपको उत्पाद माल चढ़ाने और उतारने मे कोई परेशानी नहीं होगी।

कॅटल शेड यातायात के साधन अच्छे से सकेंगे ,तब आप का उत्पाद वहा से सरलता से ढ़ो ले जाया सकेगा।

3.# पशुवैद्यक से चर्चा – (Discussion with Veterinary Doctor) :

Dairy Farming Business शुरू करने से पहले उद्यमी को अपने इलाके के पशुवैद्यकीय अधिकारी से मिलकर Dairy Farming में आवश्यक बातें और आने वाली परेशानियों एवं तकलीफों को चर्चा कर के समझना पड़ेगा।

Dairy Farm बनाने के लिए आप जिन पशुओं को पालन करने जा रहे है, उनको अच्छा आवास और घर होने की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। पशुओं को स्वस्थ निरोगी और सुरक्षित रखने के लिए अच्छा आवास होना बहुत जरूरी होता है,अपने उद्योग से ज्यादा उत्पादन लेना चाहते हो तो उनकी देखभाल भी उतनी अच्छी तरीके से रखनी चाहिए।

4.# कॅटल शेड का क्षेत्र आकारमान – (Area for Cattle Shed) :

आमतौर पर देखा गया है कि Cattle Shed के अंदर प्रति जानवर 50 वर्ग फीट एवं खुले में 80 वर्ग फुट जगह की आवश्यकता होती है। छोटे स्तर में लगभग 10 पशुओं के साथ अगर Dairy Farming शुरू करना है तो उसे कम से कम 3200 Square Feet की जगह अवश्य होती है।

मध्यम स्तर पर शुरू करने वाले उद्योग जिसमें 100 पशुओं से भी अधिक पशु हो उसे शुरू करने के लिए कम से कम 16000 से 18000 Square Feet तक के जगह की आवश्यकता होगी। जिससे हर पशु को Ventilation होगा और उठने बैठने के लिए खुली जगह हो सकेगी।

5.# खान-पान की तकनिक – (Use of Technique in Food and Water Serving to Animals) :

  • पशुओं को खाद्य (Fertilizer) रखने के लिए और पानी देने के लिए विशेष रूप से चैनल बनाए जाने चाहिए।
  • जिससे पशुओं को खाने में और पानी पीने में कोई परेशानीयाँ नहीं होंगी।
  • पशुओं को उनके अधिवास में अच्छा Ventilation, ताजा हवा और शुद्ध पानी दिया जाए।
  • साथ-साथ में पशुओं का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है ।

6.# परिवार से सहायता – (Family support) :

Small Dairy Farm बनाने के लिए या छोटा डेरी फॉर्म शुरु करने के लिए आपको कम से कम 10 दुधारू पशु रखने पड़ते हैं शुरुआती तौर पर आप अपने परिवार के सदस्यों के साथ भी यह व्यवसाय कर सकते हैं जिससे आपको मजदूरों को दिए जाने वाले पगार के रुप में पैसे खर्च नहीं होंगे, साथ ही पैसों की बचत हो सकती है जिसका उपयोग आपको आगे जाकर डेअरी फार्म की सुधारना करने में हो सकता है।

7.# योजना और व्यवस्थापन – (Planning and Management) :

Dairy Farming Business शुरु करने से पहले उस की योजना को लिखना होगा और अपनी योजना और अपने भविष्य के लक्ष्य को निर्धारित करना होगा, इसमें हाउसिंग, बिल्डिंग,फीडिंग एवं जानवरों की संख्या सब कुछ पहले से ही योजनाबद्ध होना जरूरी है जिससे चलते आगे भविष्य में कोई परेशानियां और उलझनों का सामना करना नहीं पड़ेगा

8.# पूर्वानुभव की जरुरत – (Need of Prior Experience) :

उद्यमी को व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने के लिए अपने पूरे एरिया में स्थित डेअरी फार्म के निरीक्षण करने होंगे, साथ ही डेअरी मालिकों (Dairy Owners) के साथ मुलाकात करके अपने व्यवसाय के बारे में और ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करना जरूरी है ।

ज्यादा से ज्यादा जानकारी होने के कारण भविष्य में अचानक से आए हुए संकटों का सामना करने की ताकत मिल जाती है और अनुभव से हम उस संकट में से बाहर निकल सकते हैं

9.# क्षेत्रिय अनुभव – (Field Work Experience) :

यदि उद्यमी अपने Dairy Farming Business को स्वयं द्वारा प्रबंधित और Maintain करना चाहता है।

तो उसे इसके लिये कम से कम 6 महीने से 1 साल तक किसी अन्य फार्म में काम करके उसका अनुभव लेने की आवश्यकता होती है ।ताकि वह Ground Level पर इसकी बारीकिया और जटिलताओं को समझ सके, जिसका उसे भविष्य में उपयोग हो जाएगा

10.# योग्य आहार और खुराक – (Good Food and Nutrition) :

पशुओं के भोजन को ध्यान में रखते हुए उद्यमी को यह भी समझना चाहिए कि जिन पशुओं से हम व्यवसाय शुरू कर रहे हैं उनकी अच्छी देखभाल और उन्हें पौष्टिक आहार दिया जाए तो उत्पादन में भी उतनी ही बढ़ोतरी आने वाली है।

इस को ध्यान में रखकर पशुओं को उचित मात्रा में हरा भोजन देने की कोशिश करनी चाहिए।

जिससे उनकी दूध उत्पादन की क्षमता और ज्यादा बढ़ेगी।

अगर खुद की जमीन हो तो वह खुद भी चारा का उत्पादन करके अपना चारे का खर्चा कम कर सकता है ।

आहार के साथ स्वच्छ पानी (Clean Drinking Water) भी पशुओं के लिए बहुत आवश्यक होता है जिससे पशुओं की देखभाल होती है और उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

भारतीय खाद्यसंस्कृती और दूध का महत्व (Importance of Milk in Food Culture of India)

भारत देश संपूर्ण जगत में एक कृषि प्रधान देश के रुप में जाना जाता है। भारत की 90% आबादी कृषि क्षेत्र और उससे जुड़े संलग्न व्यवसायों पर आधारीत रोजगारों पर काम करके अपना घर कारोबार चलाती है।

प्राचीन काल से जब से मानव की उत्क्रांति होना शुरू हो गया,तब मानव ने अपने रोजमर्रा की जिंदगी को सहज सुलभ करने के लिए बहुत सारे उपकरणों एवं औजारों को निर्मित किया है जिनके चलते कृषी और बाकी क्षेत्रों में बहुत अच्छी प्रगति हो रहीं है, अश्मयुगीन काल में मनुष्य अपने हाथों से बीज बोया करता था और खेती में से फसल उगाया करता था।

उत्क्रांति के दौरान मनुष्य ने अकेले रहना छोड़कर समुदाय में रहना शुरु किया,समुदाय के साथ परिवार निर्माण होने लगा,समुह संप्रदाय के साथ मानवीय जीवन प्रगती की और बढ़ने लगा और एक नयी नागरी संस्कृति का उदय होता गया।

उसी के चलते आज कृषि क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति का उपयोग मनुष्य अपनी खेतीबाड़ी और फसल उगानें में कर रहा है ,जिसके फलस्वरुप भारी मात्रा में कृषि उत्पादन लिया जा रहा है तथा हमारे भारत के कृषि उत्पाद देश के लोगों की जरूरतें पूरी करने के साथ साथ विदेशों में भी उन उत्पादों की बहुत मांग की जाती है। जिसको ध्यान में रखते हुए Dairy Farming Business शुरू करना कोई गलत नहीं होगा।

पशुपालन का महत्व-दूध के उपयोग Animal Husbandry Utility of Milk

भारत में खेती और किसानी करना यह उपजीविका का मुख्य साधन है। पिढ़ीयों से चलती आई खेती की परंपरा से बहुत सारे किसान अपनी खेती व्यवसाय के साथ-साथ मवेशी पशुओं का पालन करते आये हैं।

मवेशी जानवरों में भैस,गाय, बकरी ऐसे दूध देने वाले पशुओं का दूध के स्त्रोत के लिए प्राचीन काल से उपयोग किया जाता है ।दूध हमारे रोज के आहार का एक प्रमुख घटक है। दूध के साथ-साथ दूध से बनने वाले पदार्थ जैसे पनीर, खोया, मावा, छांछ, दही, घी, मक्खन, चीज ऐसे अनगिनत पदार्थों का हम रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग करते है।

खासकर दुध से बननेवाली मिठाईयों (Sweets) की हलवाई के दुकानो में बहुत ज्यादा मांग की जाती है।

दूध की बनी भारतीय मिठाईयां जैसे गुलाबजामुन , रसगुल्ले, पेड़े पूरी दुनिया में बेहद प्रसिद्ध है, इसलिए दूध का प्रयोग हर एक मिठाई बनाने में किया जाता है।

भारत के लगभग सभी त्योहारों में दूध से बनी हुई मिठाइयां घर घर में परोसी जाती है, Indian Sweet Dishes खीर, रबड़ी ,पेड़े बनाने के लिए दूध तो अहम आवश्यक होता है।

दूध अपने आप में एक संपूर्ण आहार है। दूध में प्रचुत मात्रा में मिल्क प्रोटीन पाया जाता है जो हमारे शारीरीक एवं मानसिक विकास के लिए बहुत लाभकारक होता है । दूध से बनने वाले पदार्थों (Milk Products) की भी बहुत ज्यादा मांग की जाती है।

पारंपारिक पशुपालन-पुनरुज्जीवन और योजनाएँ Traditional Animal Husbandry-renovation and Schemes in Hindi

प्राचीन काल से भारत में बहुत सारे लोग किसानी के साथ-साथ पशुपालन तथा दुग्ध व्यवसाय भी करते हैं मगर व्यावसायिक रूप से डेरी फार्मिंग की बहुत कम लोग जानकारी रखते है। Dairy Farming Business एक बहुत ही विस्तृत संकल्पना है ।

भारत सरकार द्वारा और भारत के सभी राज्यों की सरकारों द्वारा हमेशा से कृषी क्षेत्र से जुड़े और पारंपरिक व्यवसायों को पुनरुज्जीवन को प्रोत्साहन दिया जाता है।

पारंपारिक व्यवसायों को नये साधनों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी और मशीनों की मदद से पुन: उजागर करने के किए कार्यप्रणाली सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा प्रोग्रामो के माध्यम से कृषि क्षेत्र लाये जाते है।

कृषि प्रदर्शन और कृषि कार्यक्रमों के आयोजन संपूर्ण भारतवर्ष में अलग अलग जगहों पर मेलों के माध्यम से लगाये जाते है। जिसमें नये तंत्रज्ञान एवं खोजो का परिचय किसानो को कराया जाता है।

पारंपारिक व्यवसायों को नए अविष्कार के साथ लाया जा रहा है तथा उन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे व्यवसाय करने वाले नए युवाओं को और बेरोजगारों को भारत सरकार द्वारा सब्सिडी और अनुदान की मदद से प्रेरित किया जाता है, ताकि जो पारंपरिक व्यवसाय है उनके अच्छे दिन लाये जा सके और लोगों में व्यावसायिक उत्पन्न से आर्थिक स्तर को ऊँचा किया जा सके।

डेअरी फार्मिंग-नये दौर की चुनौतियां Dairy Farming Business in Hindi – A challenge in New Era

यूँ तो Dairy Farming Business बोलने में बहुत सीधा लगता है कि भेड़ बकरी या मवेशियों को पाल कर उनका दूध निकालो और दुध बेचकर पैसा कमायो ! मगर मात्र बोलने जितना यह सीधा और सरल होता नहीं है! इसके लिए सही Planning Management और Organization की जरूरत होती है ।

भारत में हम गाय को ‘गौ माता‘ के रूप में पूजते हैं।

दिवाली के प्रमुख त्योहार में से एक ‘वसुबारस’।

जिसमें हम गाय और उसके बछड़ों को देवता के रूप में उनकी पूजा करते हैं।

हमारी भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से पशु, वनस्पतियों तथा कुदरत के सभी घटकों को ईश्वर या देवता के रूप में देखा जाता है।\

तथा देवताओं प्रतिक मानकर उन्हें पूजा जाता है।

प्राकृतिक तत्व तथा प्रकृति ही हमारे जीवन का आधार है।

यह जानकर वैदिक युगों से उनका सम्मान और आदर-सत्कार किया जाता है।

भारतीय त्योहार- प्रकृति का सम्मान Indian festivals-Honouring Nature

भारतीय त्योहार और प्रकृति एक साथ चलते है।

हर त्योहारों का आयोजन इसी तत्वोनुसार किया जाता है।

बैसाखी, मकर- संक्रांति,अोनम बिहु ये सभी त्योहार प्रकृति का धन्यवाद मानने के लिये ही तो मनाये जाते है।

दूध देने वाले पशुओं में गाय जिसको हम ‘कामधेनु‘ से उल्लेख करते है।

वह मात्र पशु नही बल्कि भारतीय संस्कृति का पवित्र हिस्सा है।

गाय के दूध में प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जिससे बुद्धि और हड्डियों में शक्ति मिलती है।

शारीरिक कमजोरी दूर करने में भी दूध का बहुत बड़ा योगदान होता है।

दूध में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है इसकी वजह से डॉक्टर भी सब को हररोज दूध पीने की सलाह देते हैं। दूध का सेवन करने से हमारी हड्डीया और मांसपेशीयां मजबूत होती है और छोटे बच्चो के लिये तो वरदान होता है दूध,उनके बुद्धि और मानसिक विकास में महत्वपुर्ण भूमिका दुध की होती है।

दुध से बनी मिठाईयां हर त्यौहार की शान होती है। लगभग सभी मिठाइयों में दूध का प्रयोग होता है! उत्तर भारत में बनने वाली खीर, रबड़ी, बासुंदी भी दूध से ही बनती है, तथा दक्षिण भारत में बनने वाले मावे और खोये के पेड़े भी दूध से ही तो बनते हैं! पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध रसगुल्ला और महाराष्ट्र का गुलाबजामुन भी दूध से ही तो बनाया जाता है।

यदि सुची करने बैठ़ जाए तो दूध के गुण इतने हैं कि हमारी लिस्ट कम पड़ जाएगी।

मगर दुध के पदार्थों की सूची और गुण कम नहीं होंगी।

दूध का दिनचर्या में उपयोग करना बहुत जरूरी है!

आज के युग में केवल दूध ही एक ऐसा पदार्थ है जिसमें प्राकृतिक रूप से कोई भी मिलावट नहीं है,

और जिसका हम बेझिजक सेवन सकते हैं।

डेअरी फार्मिंग बिझनेस का महत्व Importance of Dairy Farming Business In Hindi

सभी जनसामान्यों के लिये दुध उपलब्ध कराना और हर व्यक्ति को दुध के गुणकारी लाभ पहुँचाना यह Dairy Farming Business का असल में योगदान होता है। अच्छे गुणवत्ता वाले गाय और भैसों का दुध नैसर्गिक रुप में निकालकर हमें उपलब्ध कराया जाता है।

औद्योगिक क्रांति होने से बहुत सारी कंपनीया और फॅक्टरी कारखाने भारत मे ब्रिटीशों और पोर्तुगीज लोगो ने स्थापित किये थे। ब्रिटिश काल में भारत में पाँच बड़े अकाल पड़े थे,जिसमें बहुत सारे मनुष्योंकी एवं पशुओं की मृत्यु हो गई थी।

अपने परिवार को भुखमरी से बचाने के लिये लोग रोजगार की तलाश में शहरों में विस्थापित हो गए ,गाँव सुमसाम हो गये, दो वक्त की रोटी के लिये लोगों ने शहरों का रास्ता पकड़ लिया!

शहरों में विस्थापित हुये लोग झोपड़ी तथा झुग्गीयाँ बनाकर रहने लगे, अस्थायी आवासों की संख्या दिन- ब -दिन बढ़ती गयी और लोगों के झुँड के झुँड गाँव छोड़कर मेहनत मजदुरी का काम करने शहरों में जाकर रहने लगे।

रोजमर्रा की जरूरत जैसे दुध,राशन और जरुरती सामान अब खरीदना पड़ने लगा।

दुकाने शुरु हो गयी जहां से नगद पैसे देकर ही ये जीवनोपयोगी चीजे खरीदकर लानी पड़ती थी।

जिसमें दूध भी एक महत्वपूर्ण चीज थी।

भारतीय खानपान में दूध की बहुत ज्यादा जरूरत रोज होती है।

उसी के चलते दूध का व्यापार शुरू हो गया और बहुत सारे लोग दूध के व्यापार करने लगे।

और मवेशी जानवरों को पाल कर गोशाला का निर्माण हुआ।

कॅटल शेड बनाकर दूध बेचकर अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने लगे।

दुध रोजमर्रा की जरूरत होने के कारण लोग भी दूध की मांग करने लगे।

Dairy Farming Business क्या है ?

आधुनिक काल में Dairy Farming Business एक रोजगार का ऐसा जरिया है जिसके द्वारा आप अपनी मेहनत और लगन से मवेशी दुध देनेवाले जानवरों को पालकर उनके दूध से महीना 1 लाख से ₹ लाख तक कमा सकते हो और अपना बहुत अच्छा व्यवसाय खड़ा सकते हो।

खेती में फसल उगाने के साथ-साथ मवेशी पालन और पशुपालन के जरिए जो दूध मिलता है, जरुरत से ज्यादा बचे दुध को बेचकर Dairy Farming Business शुरू करने से नये रोजगार उपलब्ध होते गये!

Dairy Farming Business in Hindi
Dairy Farming Business

दुग्ध व्यवसाय में आज बहुत सारे आधुनिक तंत्रज्ञान और मशीनरी आ चुकी है जिसके कारण आप व्यवसाय में तरक्की भी कर सकते हैं और बहुत ज्यादा मात्रा में दुध उत्पादन भी प्राप्त कर सकते हैं !

अब आप अच्छे से जान गए होंगे की Dairy Farming Business क्या है और इससे कितने रूपये कमाए जा सकते हैं। अब जानते हैं डेअरी फार्मिंग का व्यवसाय शुरू करने पर सरकार द्वारा कौन कौन सी योजनाएं शुरू की गयी हैं, सब्सिटी कहाँ से और कैसे लें।

डेअरी फार्म शुरु करने के लिये सरकारी योजना एवं सबसिडी Government Schemes and Subsidies Programme for Starting Dairy Farming Business

1. Dairy Farming Business करने वाला उद्यमी अगर बेरोजगार है तो उसे अपने गांव की ग्राम अधिकारी कृषि अधिकारी से मिलकर सरकारी सबसिडी के बारे में जानकारी मिल जाती है।

डेअरी फार्म का व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक सभी जानकारी ,सरकारी अनुदान की योजनाओं के लाभ से राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड की तरफ से डेअरी उद्यमिता विकास योजना डीडीएस के तहत Dairy Farming Business के लिये जरुरी पशु खरीदने को आर्थिक सहायता प्रदान करती है।

2. बछड़ा पालन (Calf Rearing) ,वर्मी कंपोस्ट, डेअरी फार्मिंग ऐसे अन्य कार्यों के लिए लघु एवं सीमांत किसानों सहित समूह को प्राथमिकता दी जाती है ऐसी योजनाओं का लाभ उठाकर सब्सिडी का भी आपको लाभ मिल सकता है।

3. साथ ही आपको Milk Cold Storage के लिए भी सब्सिडी मिल सकती है जिससे आप के Dairy Farm का दूध और दूध से बने उत्पाद के संरक्षण के लिए Cooling Storage Unit भी आप खरीद सकते हैं।

इस तरह का Cold Storage बनाने में अगर आप की लागत ₹3000000 आती है तो इसके लिए सरकार सामान्य वर्ग के आवेदकों को ₹750000 और एससी एसटी वर्ग के लोगों को अकरा लाख रुपए तक सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा के माध्यम से दी जाती है!

दुधारू पशु रख से आप अपना बिझनेस शुरु कर सकते हैं।

गाय और भैंसों की अच्छी नस्लों का चुनाव Selection of Best Breed of Cow and Buffalo in Hindi

पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय भारत में पारंपारिक व्यवसाय होते हुए भी बहुत ज्यादा चैलेंजिंग है क्योंकि आवश्यक तौर पर इस तरह का बिजनेस करना भारत में कोई आसान काम नहीं है।

1. उद्यमी चाहे तो गाय और भैंस दोनों के साथ डेअरी फार्म का बिझनेस शुरु कर सकते हैं।

2. गाय के दूध में भैंस के दूध से तुलना में कम वसा पाया जाता है जिसके कारण गाय का दूध लोगों के ज्यादा पसंदीदा होता है।

3. अपने एरिया में किस प्रकार के दूध की ज्यादा मांग होती है। यह देखकर उद्यमी को गाय या भैंस दोनों का चुनाव करना पड़ता है।

4. Dairy Farming Business के लिए विभिन्न देशी और विदेशी मवेशियों गाय और भैंसों की नस्लों का चुनाव किया जा सकता है।उद्यमी अगर चाहे तो गाय एवं भैंस दोनों को मिलाकर भी एक छप्पर के नीचे दोनों पशुअों की अलग-अलग लाइनों में व्यवस्था कर के डेअरी फार्म का मैनेजमेंट किया जा सकता है।

5. भैंसों की ज्यादा दुध उत्पाद देने वाली नस्लों में मुर्रा, सुरती, मेहसाना, जाफराबादी, भदावर इत्यादि प्रजातियां प्रसिद्ध है।

6. अच्छी उत्पाद एवं दुधारू नस्ल गायों में विशेषकर गीर, साहिवाल (Sahiwal Cattle), लाल सिंधी, थारपारकर, इत्यादि नस्ले प्रसिद्ध है।

7. विदेशी गायों की नस्लों में होल्सटीन फ्रिसियन (Holstein Friesian) , ब्राउन स्विस, जर्सी, इन नस्लों का भी उद्यमी उपयोग कर सकता है।

8. अच्छी देसी और विदेशी नस्लों से ही आपको अपने व्यवसाय में वृद्धि हो सकती है और यह नस्ले किसी भी बीमारी का अच्छी तरह सामना करती है ।यह नस्ले बहुत ज्यादा दूध देती है लगभग 25 किलो चारा खा कर एक गाय 30 से 40 लीटर तक दूध दे सकती है।

Dairy Farming

9. पशुओं को रोगों से मुक्त रखने के लिए उद्यमी को हमेशा पशुओं का समय समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए।

10. Dairy Farm के Cattle Shed में बार-बार सफाई की जरूरत होती है

क्योंकि मवेशियों के गोबर की बदबू से मवेशियों को खुद को भी तकलीफ होती है।

पूरी तरह सफाई न करने पर सांप, कैटल की शेड्स के पास अपना बसेरा बना लेते है।

जिसके चलते Cattle Shed में गर्मी को सुँघते सुँघते ये प्राणी शेड़ मे घुस जाते है ऐसे में कैटल शेड़ में काम करने वाले मजदूर और मवेशी जानवरों के भी जान पर खतरा आ सकता है।

11. कैटल शेड की नियमित रुप से सफाई करनी चाहिए और ऐसे बिल अगर दिखाई पड़ रहे हैं तो उन्हें समय रहते हटा देना चाहिए और ऐसे जानवरों और कीटकों को कैटल शेड के आसपास पनपने नहीं देना चाहिए।

जिससे जानवरों को भी सुरक्षा महसूस होगी और वह आराम से कैटल शेड में आराम के साथ रह सकते है।मवेशी जानवर सांप, बिच्छू और नाग के डंख से बहुत प्रभावित होते हैं और इनके डंख होने पर यह बेचारे मासूम जानवर बोल भी नहीं सकते कि उन्हें क्या हुआ है ?

इसलिए हमें खुद ही उनका ख्याल रखना जरूरी होता है।

12. जंगली जानवरों का भी बहुत ज्यादा खतरा होता है।बाघ,शेर जैसे हिंस्त्र जानवर भी शिकार की तलाश में मवेशी जानवरों पर हमला बोल देते है।

डेरी फार्मिंग से संबंधित कुछ आवश्यक जानकारी Some Important Information on Dairy Farming Business in Hindi

  • डेरी फार्म को खड़ा करने के लिये कम से कम 1 से 2 बीगा जमिन लगती है।
  • जिसके ऊपर आपको एक कैटल्स शेड़ बनाना होता है।
  • उसमें आपको उन कैट़ल को रखना पड़ता है।

गाय और भैंसों की चुनी हुई प्रजातियों को साथ में लेकर एक जैसी या अलग-अलग प्रजातियों को एकसाथ कैटल शेड में रखकर भी आप डेअरी फार्मिग बिजनेस शुरु कर सकते हो।

ज्यादा से ज्यादा दूध देने वाली गिर जैसी प्रजाति वाली एक गाय 50,000 से 60,000 में मिल जाती है तो एक भैंस की कीमत एक लाख तक रुपए तक भी होती है। आप गाय के साथ भैंसों को भी पाल सकते हैं तथा गाय और भैंसों को भी एकसाथ रख सकते हो।

डेअरी फार्मिंग से आप खुद अपना ब्रॅंड बना सकते हो जिसके नाम पे आप दूध एवं दुग़्ध जन्य पदार्थ बना कर देश विदेश में भी अपने बिजनेस का निवेश कर सकते हो।

अच्छे क्वालिटी के दुध,दही, पनीर ,घी को हॉटेल इंडस्ट्री तथा धार्मिक स्थलो एवं हलवाईयों की तरफ से बहुत ज्यादा मांग की जाती है। बहुत सारे डेअरी फार्मिंग वाले दुध प्रक्रिया काम भी करते है जिसमें दुध का Pasteurization करना, दुध से कलाकंद मिल्क केक बनाना, चीज, पनीर, लस्सी बनाना, Condensed Milk बनाना इत्यादि का उत्पादन लेना ऐसे भी बड़ा मुनाफा देनेवाले साईड बिझनेस भी किये जाते है!

अगर आप आरंभ से यह व्यवसाय करना चाह रहे हैं तो आप केवल 10 गाय या 10 गाय भैंसों के साथ मिलकर यह व्यवसाय शुरु सकते हैं ।केवल 10 गायों जे साथ आप अपना रोजगार और आमदानी शुरू कर सकते हैं।

गाय और भैसों के प्रजनन के बाद उनसे पैदा हुये नर और मादा पशु भी आप बेच सकते है तथा धीरे-धीरे मादाओं की संख्या बढ़ाकर आप अपना व्यवसाय बड़ा कर सकते हो जिससे आपका व्यवसाय बड़ा होता जाएगा।

डेरी फार्मिंग मैनेजमेंट Dairy Farming Business Management in Hindi

Dairy Farming Business करने के लिए मवेशी जानवर जैसे गाय तथा भैंसों का अच्छे से ख्याल रखा जाना चाहिये होता है। उन्हें समय-समय पर पशु वैद्यक से जाँच करानी पड़ती है तथा समय समय पर बीमारीयों से बचने के लिये टीकाकरण भी करना जरुरी होता है।

जिससे गाय और भैंसों को कोई बीमारी ना हो सके। गाय और भैंसों की खाद और खुराक पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है पोषक तत्वों से भरपूर खुराक और आहार देना जरुरी होता है, जिसमें हरा चारा, दुध की मात्रा बढ़ाने वाली खुराक भी उन्हें दिया जाना चाहिये।

इसलिए भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए, हर राज्य में इस तरह के बिजनेस करने के आर्थिक एवं तकनीकी रूप से प्रोत्साहन दिया जाता है। इस तरह का व्यवसाय करने के लिए उद्यमी को सरकार से अनुदान और सब्सिडी में भी मिल सकती है।

डेअरी फार्म बिझनेस के पर्यावरणीय फायदे Benefit of Dairy Farming Business to The Environment in Hindi

यह प्रोजेक्ट ऐसा होता है जिससे खेती में भी फायदा होता है, साथ ही पर्यावरण से इसे कोई हानि नहीं होती है।

1. Dairy Farming के फायदे बहुत ज्यादा होते हैं दूध के साथ साथ जानवरों का गोबर भी बहुत काम में आता है। गोबर पर प्रक्रिया करके गोबर गैस बना सकते हैं जिसका उपयोग हम घर में चूल्हा जलाने के लिए भी कर सकते हैं।

2. गोबर Gas के काम से बची स्लरी होती है ,उसे हम खाद के रूप में खेत में उपयोग कर सकते हैं जिससे खेत की फसलों में कुदरती और Chemicals विरहीत खाद डालने पर जान आ जाती है और फसलों के ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग भी आज दुनिया में बहुत की जा रही है।

3. प्राकृतिक खाद (Natural manure) की वजह से जमीन का दर्जा भी अच्छा रहता है।

जमीन का कोई नुकसान नहीं होता है जिससे जमीन उपजाऊ रहती है।

उसके तत्व भी और गुणा बढ़ जाते हैं।

4. गांव में पूराने जमाने में गोबर की रोटी बनाकर उसे धुप में सुखाया जाता था,उस गोबर की रोटी को चूल्हा जलाने में पुराने जमाने में काम लाया जाता था। आज भी बहुत से दुर्गम क्षेत्रों में ऐसी गोबर की रोटी से चूल्हा जलाया जाता है और उस पर खाना बनाया जाता है।

5. गाय का गोमूत्र भी आयुर्वेदिक दवाइयों में काम आता है जिसकी बहुत ज्यादा मांग होती है।

अगर आप भी Dairy Farming Business में रुची रखते है और आप नें मेहनत और लगन की क्षमता है और पुर्ण रुप से नियोजन तैयारी है तो इस बिझनेस से आप महिने के लाखों रुपये कमा सकते हो!

Dairy Farming के अन्य फायदे

यह ऐसा व्यवसाय है जिसमे वेस्ट मटेरियल भी फेंकना नही पड़ेगा।

अगर पारंपारिकता से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं।

तो डेरी फार्मिंग बिजनेस आपके लिए बिल्कुल सही और योग्य विकल्प हो सकता है।

मवेशी जानवर गाय और भैंसों के व्यवस्थापन और योग्य नियोजन के साथ आप यह Dairy Farming Business अच्छे से कर सकते हैं।

अगर आप किसान है तो भी यह बिझनेस आपके काम ही आएगा।

इससे मिलने वाले Bio Products भी आपको किसानी और खेती तंत्र में उपयोग में आएंगे।

गोबर गैस, सेंद्रीय खाद और ऑर्गेनिक खेती भी आप इसके Bio Products के रुप में कर कर सकते हो।

इसके साथ-साथ आप खुद भी Milk Processing का काम करके अपनी खुद की Milk Industry भी शुरू कर सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

हम उम्मीद करते हैं कि Dairy Farming Business in Hindi का ये आर्टिकल आपको अच्छे समझ आ गया होगा। हमारी दी गई जानकारी से आपको बहुत सी नई बातें पता चली होगी। जिसका आपको अपने डेअरी फार्मिंग शुरू करने में और व्यवसाय का व्यवस्थापन करने में भी फायदा ही होगा!

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