Poem on Mother in Hindi दिल को छू लेने वाली माँ कवितायें

आज का ये लेख बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाला है आज हम पढ़ेंगे Poem on Mother in Hindi से सम्बंधित कविताएं विस्तार से। और जानेंगे Mother यानि माँ क्या है ?  हो सके तो इस लेख को Internet पर अधिक अधिक सांझा करें ताकि हर बेटे बेटियों को ये पता चल जाए की जितनी ज़रूरत हमें माँ की बचपन में होती है, उतनी ही ज़रुरत बुढ़ापे में माँ को हमारी होती है।

वैसे तो माँ शब्द बहुत छोटा है पर उसके पीछे की तकलीफ उतनी ही बढ़ी है। आशा है आप इस बात की गहरायी को समझ पाएं। और इस लेख को और गहरायी से जान पाएंगे।

माँ को जानें की माँ क्या है ?

माँ की परिभाषा : माँ वो है जो खुद भूखे पे सो सकती है पर अपने बच्चों को कभी भूखा नहीं सोने देगी। माँ खुद में ऐसी शख्सियत है जिसका दर्जा कोई नहीं ले सकता।

भगवान् ने जब सोचा की की वो हर घर में नहीं रह सकता तो उसने माँ बनायीं और अपने प्रतिनिधि के रूप में हर घर में भेज दिया। ज़रा सोचिये की माँ हमारे जन्म के समय क्या क्या कष्ट उठाती है।

अपनी जान तक दांव पर लगाती है। कैसे कैसे हमें पाल पोस कर बड़ा करती है और हम बड़े होकर माँ बाप के साथ केसा व्यवहार करते हैं। उनकी सेवा करने से बचते हैं।

कई बार तो उन्हें वृद्धाश्रम तक छोड़ आते हैं। “Poem on Mother“लेख के माध्यम से हमारा आपको निवेदन है यदि आपके माता पिता जीवित हैं तो उनकी भरपूर सेवा करें। उनके आशीष लेकर घर से बाहर निकलें। अगर वह देह रूप में विद्यावान नहीं हैं तो वर्ष में एक दिन उन्हें याद करके श्रद्धांजलि दें।

आपका घर हमेशा सुख, समृद्धि से भरा रहेगा और आपके बच्चों में अच्छे संस्कार आएंगे। तो यही है माँ की परिभाषा इसे ध्यान से समझें और अपने बड़ों का आदर सत्कार करें।

Best Poem on Mother in Hindi About Love – माँ के प्यार की अदभुत हिंदी कविता

माँ बिना किसी स्वार्थ के अपने बच्चों को प्यार देती है। माँ को खुद भूखा सोना मंज़ूर है पर वह अपने बच्चों को कभी भूखा सोने देने की नौबत नहीं आने देती। माँ की कविता में हमने दोनों के बीच के प्यार को आपके सामने प्रदर्शित किया है।

1.) कविता का नाम : माँ की ममता

माँ की ममता का तोल नहीं है कोई,
तोल अगर कोई कर भी ले,
तो इसका मोल नहीं है कोई, 
माँ की ममता तो केवल माँ ही जानती है, 
माँ से बढ़ा ना तो कोई हुआ है इस दुनिया में, 
ना ही होगा कोई।

कविता का मतलब : माँ का बच्चे के जीवन में क्या योगदान है ये माँ अपने बच्चे को कभी नहीं जताती। बच्चा अगर माँ से गुस्सा भी हो जाए तो भी माँ अपने बच्चे की बुरी नज़र को उतार देती है। पूजा में भगवान् का स्थान भी माँ के बाद ही आता है। तभी इस पूरे संसार में सभी रिश्तों से आगे माँ का स्थान सबसे पहले आता है।

माँ के बिना घर के आँगन में सब कुछ हो कर भी सब सूना सा लगता है। माँ के बिना घर जैसे कोई पतछड़ के बाद सूखा पेड़ सा लगता है। इस संसार में सबसे ज़्यादा इज़्ज़त माँ को मिलनी चाहिए क्यूंकि इस मतलबी दुनिया में माँ के रिश्ते में कोई मिलावट नहीं होती।

माँ के मुख से हर बच्चे के लिए बस दुआएं ही निकलती हैं। खुद चाहे अंदर से कितनी भी दुखी हो बाहर से अपने बच्चों को खुशियां ही दिखलाती है। जितने बलिदान एक माँ अपने जीवन में देती है शायद ही कोई यह सोच पाता होगा। इसलिए तो कहते हैं की माँ की ममता को हर कोई पहचान नहीं पाता है।

2.) कविता का नाम : तू थी माँ

maa poem in hindi lyrics
Best Poem On Mother in Hindi

मेरी पहली धड़कन धड़की जिसके अंदर थी
वो तू थी माँ, 
आंखें जब खोली पहली बार तो सामने
तू थी माँ,
मेरे नन्हे पैरों को चलना जिसने सिखाया
वो तू थी माँ, 
मेरे हर सवाल का जो जवाब बन जाती थी
वो तू थी माँ।

3.) कविता का नाम : माँ

पलकें जब खुली इस जहाँ में
तुझे अपनी आँखों के सामने पाया
माँ उन अनजानों की महफ़िल में बस तेरा ही
बस तेरा ही तो चेहरा मुझे भाया

“माँ” चाहे कोई कितना भी चाह ले मुझे
पर तेरे वो नों महीने उनसे ज़्यादा ही पड़ जाएंगे,
“माँ” आँखों से जब नींदें हो जाती थी गुम
लोरियां गा के तब मुझे सुलाती थी तुम

कभी कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी
कभी कुछ मांगने की हसरत ही नहीं हुयी
क्यूंकि बिना बोले ही सब कुछ तुम सुन लेती हो, माँ

जब कभी दर्द से, रात में मैं कराहता
चैन एक पल के लिए तुझे न रहता
जब तक मेरी वो करवटें खत्म नहीं होती
तब तक, तेरी आँखों में नींद कहाँ आती

कोई बालाएं कहाँ छू पाएंगी मुझे
सामने उनके जो तुम खड़ी हो, माँ
मैंने उस रब्ब को तो नहीं देखा
पर उसका अंश मुझे तुझमें दिखा, माँ

चाहे आसमान ही क्यों न छू लूँ मैं
चाहे सारी दुनिया ही क्यों न जीत लूँ मैं
अगर तेरे होठों पे मुस्कान न ला पाया
तो बेकार है ऐसी जीत, माँ

कभी कभी तुझसे में रूठ जाता था
गुस्से में तुमसे कुछ कह जाता था
आज जब, पीछे मुड़ कर मैं देखता हूँ
अपनी नादानियों पे खुद को कोसता हूँ

आज ये कहना चाहता हूँ तुमसे
मेरी उन नादानियों के लिए
बस मुझे माफ़ कर दो, माँ।

4.) कविता का नाम : मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ

घुटनों से रेंगते रेंगते, कब पैरों पर खड़ा हुआ
तेरी ममता की छाँव में, जाने कब बड़ा हुआ
काला टीका दूध मलाई, आज भी सब कुछ वैसा है
मैं ही मैं हूँ हर जगह, माँ प्यार ये तेरा कैसा है।

सीधा साधा भोला भाला, मैं ही सबसे अच्छा हूँ
कितना भी हो जायूँ बड़ा, “माँ” मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ
कितना भी हो जायूँ बड़ा, “माँ” मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ

Sad Poem on Maa in Hindi (245 Words) माँ पर लिखी गयी उदासीन कवितायेँ

“माँ” शब्द में हमारी दुनिया समायी है
क्यूंकि उनकी दुआओं से हमने ये ज़िन्दगी पायी है
याद जब 9 महीने तक उसने हमारा बोझ उठाया था
और जब हम आये इस दुनिया में
तब इतने दर्द के बावजूद भी उसका चेहरा मुस्कुराया था

फिर ऊँगली पकड़ कर उसने तुझे चलना सिखाया
जब भी धुप आयी वो बनी तेरा साया
तुझे चोट लग जाने पर भी उसे बहुत दर्द होता था
नींद कहाँ आती थी उसे, जब तक तू ना सोता था

जब तूने अपनी मंज़िलों की और कदम बढ़ाया,तब भी वो तेरे साथ थी
तेरी दुयायें मुक्कमल हों, उसकी फ़िक्र में कटती उसकी रात थी

अब आज देख तू खुद को अपने पैरों पर खड़ा हो गया है,
माँ की ऊँगली पकड़ कर वह चलने वाला बच्चा, अब बड़ा हो गया है।

पर हम कभी कभी अपनी ज़िन्दगी में यूँ व्यस्त हो जाते हैं
की हमारे साथ साथ उनकी उम्र भी बढ़ रही है
ये बात हम भूल जाते हैं

तो अब वक़्त है माँ के लिए कुछ कर दिखाने का
जो सिखाया है उसने तुझे, वो इस जहां को दिखाने का

तो जब भी हो उसे तेरी ज़रूरत, तब तू पास उसी के हो
और निकले उसके अब आंसू अगर, तो वो आंसू ख़ुशी के हों

याद रखना जिसने तुझे ज़िन्दगी दी है
उसे अब कोई ग़म सहना न पड़े
तो बन के दिखा तू उसका प्यारा बेटा
की अब किसी भी माँ को
उसके बेटे से दूर रहना न पड़े

Meaningful Small Poem on Mother in Hindi माँ पर आधारित सार्थक लघु कवितायेँ

लबों पर उसे कभी बद्दुआ नहीं होती,
बस एक माँ है जो कभी ख़फ़ा नहीं होती।

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है,
माँ बहुत गुस्से होती है तो रो देती है।

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू
मुदद्तों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना
अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ नहीं होगा

मैं जब घर से निकलता हूँ दुया भी साथ चलती है
जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुया करती हुई ख्वाब में आ जाती है

ऐ अँधेरे देख ले तेरा मुंह काला हो गया
माँ ने आँखें खोल दी और घर में उजाला हो गया

मेरी ख्वाहिश है की में फिर से फरिश्ता हो जाऊं,
मेरी ख्वाहिश है की में फिर से फरिश्ता हो जाऊं,
माँ से इस तरह लिपटूँ की फिर से बच्चा हो जाऊं।

माँ के आगे यूँ कभी खुलकर नहीं रोना
जहाँ बुनियाद होती है इतनी नमी अच्छी नहीं होती।

लबों पर उसे कभी बद्दुआ नहीं होती,
बस एक माँ है जो कभी ख़फ़ा नहीं होती।

माँ के निस्वार्थ प्यार की ये पंकितियाँ बहुत अमूल्य हैं। इन्हे Poem on Mother in Hindi के इसी लेख में बड़ी सरल एवं शुद्ध हिंदी भाषा में आपके सामने प्रस्तुत किया है। हो सके तो इन शब्दों के अर्थ को अच्छे से पढ़ कर, इन पर अमल करें।

Maa poem in Hindi Lyrics “माँ का प्यार” कविता शब्दों में

सबसे पावन सबसे निर्मल, सब से सच्चा माँ का प्यार,
सबसे अनोखा सबसे न्यारा, सब से प्यारा “माँ का प्यार“।

बच्चे को खुद देख देख के, मन ही मन हँसता रहता,
जब संतान पे विपदा आये, तड़प ही उठता “माँ का प्यार“।

सुख की ठंडी छाँव में शीतल, पवन के जैसे लहराता,
दुःख की जलती धुप में सर पे, साया बनता “माँ का प्यार“।

मिल जायेगा यूँ तो जग में, कोई विकल्प हर रिश्ते का,
बेमिसाल है लाजवाब है, बड़ा अनूठा “माँ का प्यार“।

करते शीश झुका कर विनती, हम यही विधाता से,
“जैसे मुझको दिया है, या रब्ब ! सबको देना “माँ का प्यार !”

Heart touching Shayari on Maa माँ के प्रति दिल छू लेने वाली शायरी

शायरी का नाम : अनपढ़ माँ – एक कड़वा सच (भाग 1)

मेरी माँ आज भी अनपढ़ ही है, रोटी एक मांगता हूँ और वो दो लाकर दे देती है। जी हाँ दोस्तों, कुछ ऐसी ही होती है माँ। एक माँ सबकी जगह ले सकती है मगर इस दुनिया में कोई भी माँ की जगह नहीं ले सकता।

शायद इसलिए कहते हैं की कभी अपनी माँ का दिल नहीं दुखाना चाहिए। क्यूंकि वो आपकी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकती है। चलिए इस Poem on Mother in Hindi लेख में शुरू करते हैं एक दिल को छू लेने वाली शायरी जो माँ पर आधारित है।

हर रिश्ते में मिलावट देखी
कच्चे रंगो की सजावट देखी
लेकिन सालों साल देखा है उस माँ को
उनके चेहरे पे न कभी थकावट देखी
न ममता में कभी मिलावट देखी।

आज फिर गुज़रा ज़माना याद आता है
आज फिर मुझे घर का खाना याद आता है
दिन भर की थकावट जब भूख में बदलती है
वो प्यार से माँ का खिलाना याद आता है।

मेरी ख़ातिर तेरा रोटी पकाना याद आता है
अपने हाथों को चूल्हे में जलाना याद आता है
वो डांट डांट कर खिलाना याद आता है
मेरे वास्ते तेरा पैसा बचाना याद आता है।

कहीं हो जाए न घर की मुसीबत मुझे मालूम
छुपा कर तकलीफें तेरा मुस्कुराना याद आता है।
जब आये तुझे हम छोड़ कर परदेस मेरी माँ
मुझे वो तेरा आंसू बहाना याद आता है।

ये भी पढ़ें :- Kamal Kakdi Ke Fayede

—————————————————————————————————————————————–

शायरी का नाम : अनपढ़ माँ – एक कड़वा सच (भाग 2)

ज़िन्दगी के सफर में हम बहुत आगे निकल जाते हैं, नए रिश्ते बनाते हैं नए दोस्त बनाते हैं। और अपनी ज़िन्दगी में इतने मसरूफ हो जाते हैं की उस माँ का हाल पूछने के लिए एक फ़ोन करने का समय भी हमारे पास नहीं होता।

हम उस माँ को भूल जाते हैं जिसने हमको 9 महीने पेट में रख कर पाला था। दोस्तों याद रखना पूरी दुनिया आपका साथ छोड़ देगी तब भी आपकी माँ आपका साथ नहीं छोड़ेगी। वह हमेशा केवल आपका भला चाहती है।

तभी तो किसी ने क्या खूब लिखा है, मेरी तकदीर में एक भी ग़म न होता, अगर तकदीर लिखने का हक़ मेरी माँ को होता। शायद यही वजह है की उम्र कोई भी हो लेकिन जब चोट लगती है तो मुंह से सबसे पहला लफ्ज़ माँ ही निकलता है।

जब हम बोलना नहीं जानते थे तो हमारे बोले बिना माँ हमारी बातों को समझ जाती थी। और आज हम हर बात पर कह देते हैं की “छोड़ो माँ तुम नहीं समझोगी“।

तेरे डिब्बे की वो दो रोटियां कहीं बिकती नहीं माँ
महंगे होटलों में आज भी भूख मिटती नहीं माँ
भरे हुए घर में तेरी आहट मिलती नहीं माँ
तेरी बाहों की नर्माहट कहीं मिलती नहीं माँ
मैं तन पे लादे फिरता हूँ दुशाला रेशमी
लेकिन तेरी गोदी की गर्माहट कहीं मिलती नहीं माँ

—————————————————————————————————————————————–

शायरी का नाम : अनपढ़ माँ – एक कड़वा सच (भाग 3)

दोस्तों कुछ ऐसी ही होती है माँ, अपने बच्चों के सपनों के लिए अपनी बहुत सी ख्वाहिशों का त्याग सिर्फ माँ ही कर सकती है। दुनिया में केवल माँ एक ऐसी है जो साल के 365 दिन बिना छुट्टी और बिना पगार के काम करती है। फिर फर्क नहीं पड़ता की दुनिया क्या कहती है में खूबसूरत हूँ बहुत ये मेरी माँ कहती है।

बचपन में माँ का चोट पर हलके से फूंक मारना और कहना बस अभी ठीक हो जायेगा। वैसा मलहम आज तक नहीं बना।

बहुत बुरा हो फिर भी उसको भला कहती है – अपना गन्दा बच्चा भी माँ दूध का धुला कहती है।

सीधा साधा भोला भाला में ही सबसे सच्चा हूँ,
कितना भी हो जायूँ बड़ा में आज भी तेरा बच्चा हूँ।

दोस्तों इस लेख के अंत में हम बस इतना कहना चाहेंगे की जिसने तुम्हे 9 महीने पेट में, 3 साल हाथों में और ज़िन्दगी भर दिल में जगह दी। उस माँ की हमेशा कदर कीजिये। क्यूंकि कभी कभी ऐसा होता है की किसी इंसान की कदर हमें तब पता चलती है। जब वो हमारे पास इस दुनिया में नहीं होता।

दोस्तों दिन भर कमाने के बाद दोस्त पूछते हैं की कितना कमाया। लेकिन सिर्फ एक माँ ही ऐसी है जो पूछती है बेटा कुछ खाया या नहीं।
माँ की दुया कभी खाली नहीं जाती
माँ की दुया कभी टाली नहीं जाती
बर्तन माँझ कर भी तीन चार बच्चे पाल लेती है माँ
मगर दुनिया दी कड़वी सच्चाई ये है की
तीन चार बच्चों से एक माँ पाली नहीं जाती।

माँ के कंधे पर सर जब रखा मैंने और पूछा माँ से
कब तक यूँही अपने कंधे पर सोने दोगी
तो माँ ने कहा बेटा :
तब तक की जब तक लोग मुझे
अपने कंधे पर नहीं उठा लेते।

Conclusion : निष्कर्ष 

माँ जो भी बनाये उसे बिना नखरे किये खा लिया करो क्यूंकि दुनिया कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास या तो खाना नहीं होता या माँ नहीं होती। दोस्तों अगर आप हमारी बातों और इस लेख से सहमत हैं तो इस लेख Poem on Mother in Hindi (आर्टिकल) को Whatsapp, Facebook, Twiiter इतना शेयर कीजिये की ये हर बेटे तक पहुँच जाए। अगर आपकी अपनी माँ से बहुत दिनों से बात न हुई हो तो तो आज ही अपनी माँ को फ़ोन कीजिये और कह दीजिये उन्हें, माँ I Love You.

Poem on Mother in Hindi

ये पूरा लेख पढ़ने के लिए हम आपके बहुत आभारी हैं, धन्यवाद।

Leave a Comment